राष्ट्रसंघ की महासभा की कमेटी में इस्राईल विरोधी प्रस्ताव एसी स्थिति में पारित हुआ है जब परमाणु हथियार होने के बावजूद इस्राईल ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इस बात को नहीं स्वीकारा है।
ज्ञात रहे कि इस्राईल राष्ट्रसंघ के उन गिने चुने सदस्यों में से एक है जिसने परमाणु हथियार अप्रसार संधि NPT पर न तो हस्ताक्षर किया है और न ही अंतरराष्ट्रीय पर्वेक्षकों को अपने परमाणु संयंत्रों को निगरानी की अनुमत दी है।
राष्ट्रसंघ की महासभा में जो प्रस्ताव पेश किया गया उसका मसौदा मिस्र के सुझाव पर तैयार किया गया था और इसके पक्ष में 152 देशों ने वोट दिया जबकि अमेरिका और कनाडा सहित 5 देशों ने इसके खिलाफ वोट दिया और 24 देशों ने वोटिंग में भाग ही नहीं लिया।
मिस्र ने इस्राईल के खिलाफ जो मसौदा तैयार किया था उसे फिलिस्तीनी प्रशासन और 19 अरब देशों का समर्थन प्राप्त था। इसी प्रकार राष्ट्रसंघ की महासभा की कमेटी ने पिछले शुक्रवार को उस प्रस्ताव के पक्ष में ईरान सहित 170 देशों ने वोट दिया था जिसमें मध्यपूर्व को परमाणु हथियार रहित बनाये जाने की मांग की थी।
ज्ञात
रहे कि इस्राईल के पास लगभग 300 परमाणु वार हेड्स हैं और वह पूरी दुनिया
विशेषकर मध्यपूर्व की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।
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